कभी कभी
अनायास ही
सुनाई पडती है
अजीब सी पदचाप
जैसे कोई आवाज़ दे रहा हो
शायद मंद मंद हवा में
खिल रहा हो
कोई पारिजात
या उस नीम पर बैठी
काली चिड़िया की चहचहाहट
या फिर कमल के पत्तों पर
सहेज कर रखी
बारिश की कुछ बूंदें
सरक रही हों....
पर क्यों
अब भी
अपने एकांत में
खुद की आवाज़
समझ नही आती
और ...हो लेते हैं
उस अजीब पदचाप के साथ
थकी हारी देह से
निकल कर मेरे स्वप्न
@मोनिका शुक्ला
कल्पना गजब की हे
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