Sunday, 11 January 2015

कभी कभी
अनायास ही
सुनाई पडती है
अजीब सी पदचाप
जैसे कोई आवाज़ दे रहा हो
शायद मंद मंद हवा में
खिल रहा हो
कोई पारिजात
या उस नीम पर बैठी
काली चिड़िया की चहचहाहट
या फिर कमल के पत्तों पर
सहेज कर रखी
बारिश की कुछ बूंदें
सरक रही हों....
पर क्यों
अब भी
अपने एकांत में
खुद की आवाज़
समझ नही आती
और ...हो लेते हैं
उस अजीब पदचाप के साथ
थकी हारी देह से
निकल कर मेरे स्वप्न

@मोनिका शुक्ला

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