Tuesday, 17 February 2015

पेपर वेट

इक छोटा
गोल सा पेपर वेट
सैकड़ों रंगीन
नन्ही नन्ही बुंदकियो
से भरा
तब उसी के
इर्द गिर्द
सिमटी थी मेरी दुनिया
साथ उसके
घंटो खेलती थी
अंदर की रंगीन
खूबसूरत दुनिया
सम्मोहित करती थी
जब छोटी थी मै...
फिर न जाने
कब वक़्त घूमा
पेपर वेट तब्दील हो गया
मायावी दुनिया में
जो रंगीन तो थी पर
अजब गजब तमाशों से भरी
धूप छाँव दिखाती
मेरा खेल ..खेल न रहा
और तब मै भी बस
इक बुंदकी बन बन रह गयी

@मोनिका शुक्ला

Sunday, 15 February 2015

प्रेम

प्रेम
एक आनन्ददायक पीड़ा
जिसे
मैने तुमने
हमने
हाँ...हम सभी ने
अनुभूत तो किया
पर
व्यक्त नही कर पाए
एक खुशबु....प्रेम
जिसे श्वास में भर लिया
और झूम लिए
अथाह उल्लास में
एक अश्रु...प्रेम
जो बह निकला
नयनो की कोर से
और डूब गये
अथाह बिषाद में
हाँ.........प्रेम इक एहसास मात्र
जिसे मैने तुमने  हम सभी ने
साक्षात्कार किया बस

@मोनिका शुक्ला

प्रेम

उसके प्रेम में
हसंता था मन
और..इसीलिये नाचता था मन
उसके प्रेम में
जाता था दिल
उस सड़क तक रोज़
जिस पर गुजरता था वो ।
उसके प्रेम में
इसी जीवन में
कई कई बार
जनम लिया ।
उसके प्रेम में
बहुत शब्द थे
मेरे पास
झहराते मेघों से ।
उसके प्रेम में
थिरकती थी दूब
रात भर
भीग कर ओस में ।
बारिश में
धुंध के साथ
चलती थी
जंगली हवा
उसके प्रेम में

@मोनिका शुक्ला