Sunday, 15 February 2015

प्रेम

उसके प्रेम में
हसंता था मन
और..इसीलिये नाचता था मन
उसके प्रेम में
जाता था दिल
उस सड़क तक रोज़
जिस पर गुजरता था वो ।
उसके प्रेम में
इसी जीवन में
कई कई बार
जनम लिया ।
उसके प्रेम में
बहुत शब्द थे
मेरे पास
झहराते मेघों से ।
उसके प्रेम में
थिरकती थी दूब
रात भर
भीग कर ओस में ।
बारिश में
धुंध के साथ
चलती थी
जंगली हवा
उसके प्रेम में

@मोनिका शुक्ला

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