Tuesday, 20 January 2015

चाहत मेरी

रत्ती भर आसमां
चाहत मेरी
टुकड़ा जमी
तमन्ना यही
कुछ दूर तक हो साथ तेरा
यह सपना मुझे
अब भाता नही
कमरों के पीछे
खिडकी के नीचे
उगने लगा कुछ
तुझे दिखता नही
किताबों में छिप कर
चुप चाप रहना
मुझको अब ये
सहना नही
तकते हैं लोग
कुछ कहते हैं वो
हँसी मुझको सबकी
अच्छी लगती नही
सुना तुमने कुछ
मै क्या कह रही हूँ
फूल खिलने लगा
तुमने देखा नही

@मोनिका शुक्ला     

1 comment:

  1. Waaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

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