रत्ती भर आसमां
चाहत मेरी
टुकड़ा जमी
तमन्ना यही
कुछ दूर तक हो साथ तेरा
यह सपना मुझे
अब भाता नही
कमरों के पीछे
खिडकी के नीचे
उगने लगा कुछ
तुझे दिखता नही
किताबों में छिप कर
चुप चाप रहना
मुझको अब ये
सहना नही
तकते हैं लोग
कुछ कहते हैं वो
हँसी मुझको सबकी
अच्छी लगती नही
सुना तुमने कुछ
मै क्या कह रही हूँ
फूल खिलने लगा
तुमने देखा नही
@मोनिका शुक्ला
े
Waaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
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