उस दिन
पहाड़ से उतरते हुए
अचानक याद आ गये तुम
ऐसा नही है कि
यह पहली मर्तबा हुआ
हाँ......तुम्हारी याद
अब भी है
और अक्सर
मेरे आस पास / डोलती रहती है
वोई तुम्हारी खुशबु
कुछ...गीली सी ।
और अक्सर
रात के सन्नाटे में
धक् से.......चौंक जाता है दिल
जब महसूस होती है
तुम्हारे ओंठों की छुअन
मेरे .....माथे पर ।
हाँ तो .......उस दिन फिर
पहाड़ से उतरते हुए
तुम्हारी याद ........
साथ हो ली / आहिस्ता से ।
तब .....तभी
पतझड़ की हवा
धूप छांव करने लगी
और .....तुम्हारे साथ
उस नदी में
बहुत गहरे ....
मै भी उतरती गयी
@मोनिका शुक्ला ँ
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