उसकी छत से होकर
जो आयी है अभी
बहकती हवा
कहीं दहका न दे
मेरे कुछ
सुलगते ख्वाब....
जो छिप कर
बैठे हैं....
पलकों की ओट में
...तो गुमशुदा
उसकी यादें
झट से आ जायेंगी
जैसे तीली से
भक से निकलती रोशनी
..और मुझे रुलायेंगी
हंसाएंगी...पगलायेंगी
अब....आने लगी है
धीरे धीरे
अमलतास के नए पत्तों से
उसकी पहिचानी खुशबु
और गिरने ही वाला है
मेरी पोरों मेंे
इक कतरा
छिपा उसका प्रेम
@मोनिका शुक्ला
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