Saturday, 24 May 2014

क्यों करनी पडती है
सुख की अभिलाषा
और क्यों...
बिन मांगे
हर बार
चले आते हैं
दुःख जीवन में

ं नई कोपलें
दिन गिन गिन कर
चेहरा चमकाती हैं
और क्यों..
पतझड़ में
झड जाते हैं
सारे पत्ते
शाखों से

ों छिटक रहे
वो पल छिन सारे
साथ कभी जो बांटे
और क्यों....
बस रह जाती हैं
भूली बिसरी यादें
इस मन में

@मोनिका शुक्ला

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