इक छोटा
गोल सा पेपर वेट
सैकड़ों रंगीन
नन्ही नन्ही बुंदकियो
से भरा
तब उसी के
इर्द गिर्द
सिमटी थी मेरी दुनिया
साथ उसके
घंटो खेलती थी
अंदर की रंगीन
खूबसूरत दुनिया
सम्मोहित करती थी
जब छोटी थी मै...
फिर न जाने
कब वक़्त घूमा
पेपर वेट तब्दील हो गया
मायावी दुनिया में
जो रंगीन तो थी पर
अजब गजब तमाशों से भरी
धूप छाँव दिखाती
मेरा खेल ..खेल न रहा
और तब मै भी बस
इक बुंदकी बन बन रह गयी
@मोनिका शुक्ला
Waaaaaaaahhhhhhhhh
ReplyDeleteWaaaaaaaahhhhhhhhh
ReplyDeleteWaah
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